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सांप्रदायिकता [Communalism]

  • सांप्रदायिकता, एक राजनीतिक समस्या है ना कि धार्मिकसामाजिक समस्या है जब धर्म का प्रयोग राजनीतिक उद्देश्यों एवं सत्ता प्राप्ति के लिए किया जाए तो इसे “संप्रदायिकता” बोलते हैं |
  • संप्रदायिकता का अर्थ है किसी व्यक्ति द्वारा धार्मिक समुदाय के  प्रति प्रेम को राष्ट्र पर प्राथमिकता देना तथा किसी भी अन्य धार्मिक समुदाय के हितों की कीमत पर अपने संप्रदाय हितों को बढ़ावा देना |
  • इसकी जड़े ब्रिटिश शासन में भी थी जहां सन 1919 और 1935 के अधिनियम में मुस्लिम  सिख व अन्य को  सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व दिया गया था |

संप्रदायिकता का विकास (Development of communalism)

  • भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में संप्रदायिकता के विकास के लिए ब्रिटिश शासन की बांटो और राज करो नीति उत्तरदायित्व मानी जाती है इसके अंतर्गत 1857 अंग्रेजों के विरुद्ध प्रथम स्वाधीनता संघर्ष के पश्चात अंग्रेजों ने मुसलमानों के साथ भेदभाव पूर्ण नीति अपनाई क्योंकि 1857 की मुसलमानों को उत्तरदायित्व ठहराया था |
  • कालांतर में 1857  के बाद ब्रिटिश शासन ने अपनी नीति में परिवर्तन करते हुए मुसलमानों के संरक्षण को बढ़ावा दिया था अंग्रेजों ने हिंदुओं के साथ के साथ भेदभाव करना प्रारंभ किया  |
  • दूसरी ओर अलीगढ़ स्कूल ने अंग्रेजों को मुसलमानों का हितैषी कहा और उन्हें कांग्रेस में शामिल होने से मना कर दिया | इसी परिप्रेक्ष्य में ब्रिटिश सरकार ने  कांग्रेस को हिंदू एवं मुख्य रूप से एक ब्राह्मणवादी संगठन कहां |
  • वर्षों  1906  में मुस्लिम लीग की स्थापना के साथ अंग्रेजों ने मुस्लिम लीग को समर्थन व संरक्षण प्रदान किया था| बंगाल विभाजन के परिप्रेक्ष्य में भारत में  गर्मपंथी राष्ट्रवादियों को संतुलित करने के लिए अंग्रेजों ने मुस्लिम लीग का प्रयोग किया |
  • वर्ष 1909 में मार्ले मिंटू सुधार के द्वारा संप्रदायिक प्रतिनिधित्व को स्वीकारते हुए ब्रिटिश शासन ने भारत में सांप्रदायिकता को वैधानिक रूप दे दिया | गर्मपंथी राष्ट्रवादियों ने जिन  धार्मिक प्रतीकों का प्रयोग किया उससे भी संप्रदायिकता के विकास को बढ़ावा मिला |
  • वर्ष 1920 के दशक में आर्य समाज की शुद्धि आंदोलन, मुस्लिमों के तंजीम तबलीग आंदोलनों, के द्वारा भारत में सांप्रदायिक हिंसा भी देखने को मिली दूसरी ओर हिंदू महासभा ने स्वयं को हिंदुओं के प्रतिनिधित्व के रूप में प्रस्तुत किया  |
  • भारत में सांप्रदायिकता के विकास का उग्रवादी  चरण वर्ष 1937 के पश्चात देखा जा सकता है |
  • जब वर्ष 1930 के चुनाव में मुस्लिम लीग को चुनावी असफलता मिली तो   मुस्लिम लीग ने आक्रमण नीति का प्रयोग करते हुए इस्लाम को खतरे में होने का नारा दिया | अब  मुसलमानों के हितों के संरक्षण के लिए एक अलग राष्ट्र की आवश्यकता है |
  • इसी संकल्प राष्ट्रवाद का किसी के परिणाम स्वरूप वर्ष 1947 में भारत का धर्म के आधार पर विभाजन हो गया |

स्वतंत्र भारत में पंथनिरपेक्ष राज्य और संप्रदायिकता (Secular State and Communalism in Independent India)

  • 42 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के द्वारा पंथनिरपेक्ष शब्द जोड़ा गया जिससे इस बात को बल मिलता है कि भारत, एक पंथ निरपेक्ष राष्ट्र   है |
  • भारतीय पंथनिरपेक्षता का अभिप्राय नहीं है कि, राज्य धर्म का विरोध होगा, बल्कि धर्म व्यक्ति की आस्था का विषय है , जिसका राज्य से कोई संबंध नहीं है |
  • पंथनिरपेक्ष राज, धार्मिक राज्य और धर्म विरोधी राज्य के बीच का मार्ग है |
  • भारतीय संविधान में पंथनिरपेक्ष राज्य का विचार अंतर्निहित है अनुच्छेद 15 , अनुच्छेद -16(2), अनुच्छेद 29(2) अनुच्छेद -25 (1) के अंतर्गत धर्म को अंत : कारण से  आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता है जिससे स्पष्ट होता है कि धर्म की आस्था का विषय है |

सांप्रदायिक सौहार्द के लिए राष्ट्रीय पेंशन के लिए राष्ट्रीय फाउंडेशन()

  • की स्थापना वर्ष 1992 हुई हुई थी गृह मंत्रालय के अधीन स्वायत्तता निकाय स्वतंत्र निकाय है| सांप्रदायिक, सौहार्द, भाईचारा, तथा राष्ट्रीय एकता को बनाए रखती है |

Must read :–
राजभाषा(Official Language)
मूल कर्तव्य (Core Duties)
महत्वपूर्ण संविधान संशोधन(Important Constitution Amendment)
Vice-President -(उपराष्ट्रपति )
भारतीय संविधान(Indian Constitution)
संविधान के स्रोत : प्रकृति एवं विशेषताएं
संविधान की प्रस्तावना(Preamble to the Constitution)
नागरिकता(Citizenship)
मूल अधिकार (Fundamental Rights)
Directive Principles of Policy (Part -4, Articles 36 – 51)

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