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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग {National Human Rights Commission}

मानव अधिकार (Human Rights)

  • मानवअधिकारों  से तात्पर्य, ऐसे अधिकार से है जो व्यक्ति को मनुष्य होने के कारण प्राप्त होते हैं |
  • यद्यपि  भारतीय संविधान में मानवअधिकारों के रूप में मौलिक अधिकारों की व्यवस्था है जिसे उच्चतम न्यायालय संरक्षण प्रदान करता है परंतु वर्ष 1948  में घोषित मानवअधिकार अत्यंत व्यापक है जो किसी राष्ट्र राज्य की सीमाओं से परे है |
  • मानवअधिकार पूरी मानव जाति को प्राप्त होते हैं जबकि मौलिक अधिकार देश का नागरिक होने के कारण ही प्राप्त होते हैं |
  • मानवअधिकार की रक्षा हेतु राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन एक संवैधानिक निकाय है इसका गठन संसद में पारित मानवअधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के अंतर्गत हुआ था |
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग मानव जाति के मानवअधिकारों का प्रहरी कहा जाता है|

 भारत में इसकी स्थापना के निम्नलिखित कारण है(Its establishment in India is due to)

  • भारत में संयुक्त राष्ट्र संघ मानव अधिकार घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं |
  • वर्ष 1990 के बाद पूरे विश्व में मानव अधिकार के संरक्षण की दिशा में अनेक प्रयास किए हैं और भारत के पुलिस कमीशन की रिपोर्ट में भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग स्थापना पर बल दिया गया है |
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, उच्चतम न्यायालय की शक्तियों का विरोधी नहीं,  वरना पूरक है क्योंकि मानव अधिकार की रक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय के कार्यों के बोझ को कम करने के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की स्थापना की गई है |
  • प्रतिवर्ष 10 दिसंबर को राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस नेशनल हुमन राइट्स डे के रूप में मनाया जाता है |

राष्ट्रीय मानव आयोग की संरचना(National Human Commission Structure)

  • अंतरराष्ट्रीय संधियों (पेरिस संधि) के अनुसार भारत में मानव अधिकार आयोग की स्वतंत्रता  अधिक बल प्रदान किया गया है |
  • यह एक बहुत सदस्य संस्था है जिसमें एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते हैं यह सदस्य स्थाई होते हैं |
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश होता है और 2 सदस्य उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालय के कार्य या अवकाश प्राप्त न्यायाधीश होते हैं तथा दो अन्य सदस्य भी होते हैं जिनको मानवाधिकार के संदर्भ में विशेष जानकारी हो |
  • National Human Rights Commission

स्थाई सदस्यों के अतिरिक्त राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में चार पदेन सदस्य भी होते हैं जो इस प्रकार हैं

  • राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष |
  • राष्ट्रीय महिला आयोग का अध्यक्ष|
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष|
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का अध्यक्ष
  • राष्ट्रीय मानव आयोग की संरचना उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश |
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नियुक्ति की प्रक्रिया(Appointment process)

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली 6 सदस्य समिति की अनुशंसा पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है|

 6 सदस्य समिति(6 member committee)

  • प्रधानमंत्री लोकसभा में विपक्ष का नेता |
  • राज्यसभा में विपक्ष का नेता |
  • लोकसभा अध्यक्ष|
  • राज सभा के उपसभापति
  • गृहमंत्री

राष्ट्रपति, इस समिति की अनुशंसा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करते हैं |

इसके अतिरिक्त भारत के मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश अथवा उच्च न्यायालय के किसी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की जाती है|

सदस्यों का कार्यकाल(Tenure of members)

  • आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल अधिकतम 5 वर्ष या 70 वर्ष की उम्र तक( इसमें से जो भी पहले पूरा) होता है|
  • अवकाश प्राप्ति के पश्चात के सदस्यों को संघ सरकार या राज्य सरकार के किसी सेवा के अंतर्गत नियोजित नहीं किया जा सकता है|
  • आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की पद मुक्ति के लिए उच्चतम न्यायालय की सहमति आवश्यक है और उच्चतम न्यायालय की अनुशंसा के बाद ही अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों को उनके पद से मुक्त किया जा सकता है |
  • कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के वेतन  म भी कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं होता है|

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के कार्य (Functions of National Human Rights Commission)

  • संविधान के मुख्य संविधान के प्रावधानों का क्रियान्वयन करना जिसमें मानव अधिकारों का उल्लेख है
  • मानव अधिकारों के हनन के मामले की जांच करना |
  • कोई भी व्यक्ति मानवअधिकार  हनन की शिकायत राष्ट्रीय मानव अधिकार के समक्ष कर सकता है जिसे राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा निस्तारित करने का प्रयत्न किया जाएगा|
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का कार्य मानवअधिकारों के संदर्भ में जागरूकता पैदा करना , संबंधित अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा मानव अधिकार से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संधियों लागू करना |
  • विभिन्न स्तर की मानव अधिकारों की समितियों के गठन की अनुशंसा करना मानवअधिकार का कार्य सरकार की एजेंसियों की सहायता लेकर किया जाता है|
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, मौलिक अधिकारों , तथा मानवअधिकारों की रक्षा करना है तथा इनका हनन होने पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा भी करता है |
  • मानव अधिकार आयोग ऐसी संस्था है जो नागरिकों को नि:शुल्क न्याय दिलाती है तथा मानवअधिकारों के हनन पर संज्ञान भी लेते हैं |

आयोग की शक्तियां(Powers of commission) : National Human Rights Commission

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग , लोक नियुक्ति प्रक्रिया संहिता 1908  के तहत सिविल न्यायालय के समक्ष शक्तियां धारण करता है

  • वह पुलिस से समस्त कार्यवाहीओं की रिपोर्ट को भी मांग सकता है और किसी भी व्यक्ति को समन जारी कर सकता है
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग  सिविल न्यायालय की भूमिका में कार्य करता है जिसके द्वारा मानवाधिकारों की रक्षा करता है
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा कारागार  निरीक्षण बाल श्रम उन्मूलन हेतु कारखानों का निरीक्षण करना जिसमें मानव अधिकारों के हनन की संभावना होती है, का कार्य भी किया जाता है
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग उच्चतम न्यायालय ने मानव अधिकारों से संबंधित विभिन्न विषयों में भी सहायता प्रदान करता है
  • आयोग का प्रधान कार्यालय दिल्ली में स्थित है तथा भारत में अन्य स्थानों पर भी अपने कार्यालय खोल सकता है आयोग की कार्यप्रणाली है तथा इसके अनुसार कार्य करने के लिए अधिकृत है
  • आयोग के पास मानव अधिकार के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों की जांच दल है इसके अतिरिक्त आयोग केंद्र अथवा राज्य सरकारों की किसी भी अधिकारी जांच एजेंसी की सेवाएं ले सकता है

आयोग के द्वारा की गई जांच के बाद की कार्यवाही (Proceedings after investigation by the Commission)

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के द्वारा इस मामले की जांच पूरी होने के पश्चात लिखित कदम उठाए जा सकते हैं |
  • यह पीड़ित व्यक्ति को नुकसान के भुगतान के लिए संबंधित सरकार या प्राधिकरण प्राधिकरण को सिफारिश कर सकता है |
  • यह दोषी लोक सेवक के विरुद्ध वंदीकरण हेतु कार्यवाही प्रारंभ करने के लिए संबंधित सरकार या प्राधिकरण को सिफारिश कर सकता है |
  • यह संबंधित सरकार या प्राधिकरण से  तत्काल अंतरिम सहायता प्रदान करने की सिफारिश कर सकता है|
  • आयोग उच्चतम न्यायालय या संबंधित उच्च न्यायालय में भी अपील करने की शक्ति रखता है |
  • आयोग द्वारा संज्ञान के परिणाम स्वरुप लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा और अनौपचारिक रूप से संभव होगी |
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में पहुंचने शिकायत दर्ज कराने के लिए पैसा भी नहीं खर्च  होगा तथा लोगों की समस्याओं का निपटारा भी यथाशीघ्र हो सकेगा |

राज्य मानव अधिकार आयोग की सीमा(Human Rights Commission limits)

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के के द्वारा दी गई अनुशंसा  सलाहकारी होती हैं  इसीलिए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग किसी व्यक्ति को दंडित करने का अधिकार है और ना ही किसी व्यक्ति या अन्य कोई सहायता देने का अधिकार है |
  • आयोग की सलाह सरकार पर बाध्यकारी नहीं है फिर भी प्रावधान है कि सरकार 1 माह की अवधि में  आयोग को यह सूचित करें कि उक्त विषय पर किस प्रकार की कार्यवाही की गई |
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग सैन्य बलों के द्वारा मानव अधिकार के हनन की जांच नहीं कर सकता |
  • National Human Rights Commission

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