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संविधान के स्रोत : प्रकृति एवं विशेषताएं

संविधान के  स्रोत :  प्रकृति एवं विशेषताएं : (Sources of the Constitution: Nature and Characteristics)

  • संविधान निर्माताओं ने कई देशों के संविधान से प्रेरणा  लेते हुए भारतीय दशाओं के अनुरूप अपने संविधान को ढाला
  • सांसद – ब्रिटिश मॉडल से प्रेरित होते हुए भी मुख्य अंतर यह है कि भारत में यह संविधान के अधीन हैं जबकि ब्रिटेन में संसद ही सर्वोच्च है इस प्रकार भारत ‘संघ’ होते हुए भी अमेरिकी फेडरेशन से भिन्न (भारत के केंद्र को अधिक शक्ति प्राप्त) है |

ब्रिटेन – संसदीय शासन प्रणाली

  • कानून का शासन
  • एकल नागरिकता
  • विधि निर्माण प्रक्रिया
  • संसदीय विशेषाधिकार
  • राष्ट्रपति की औपचारिक प्रधानता

अमेरिका

  • मूल अधिकार
  • न्यायिक पुनर्विलोकन
  • संविधान की सर्वोच्च था
  • उपराष्ट्रपति का पद
  • राष्ट्रपति को वीटो पावर
  • महाभियोग की प्रक्रिया
  • सुप्रीम सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता

 आयरलैंड

  • नीति निर्देशक तत्व
  • राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में साहित्य कला विज्ञान व समाज सेवा हेतु मनोनयन

 ऑस्ट्रेलिया

  • प्रस्तावना की भाषा
  • समवर्ती सूची
  • केंद्र राज्य संबंध

 जर्मनी

  • आपातकालीन उपबंध
  • कनाडा
  • संघात्मक प्रणाली
  • अवशिष्ट शक्तियां
  • दक्षिण अफ्रीका
  • संविधान संशोधन

रूल

  • मौलिक कर्तव्य 42 वें संशोधन द्वारा |
  • जापान सी विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया को अपनाया गया है |

Sources of the Constitution: Nature and Characteristics

संविधान सभा में महिला सदस्य (Women Members in Constituent Assembly) – Sources of the Constitution: Nature and Characteristics

  • पूर्णिमा बनर्जी
  • रेणुका राव
  • सरोजिनी नायडू
  • विजयलक्ष्मी पंडित
  • बेगम एजाज रसूल
  • स्वामीनाथन
  • दीनी मास कारण
  • सुचेता कृपलानी
  • कमला चौधरी
  • लीला राय
  • मालती चौधरी
  • राजकुमारी अमृत कौर
  • दासयानी वेलयुद्धन
  • हनसा मेहता
  • दुर्गाबाई देशमुख
भारतीय संविधान की प्रकृति – Sources of the Constitution: Nature and Characteristics
  • संघात्मक(union) है |
  • ध्यान रहे(Important ) –  यह अमेरिका की तरह सेंट्रल(Federal) नहीं है क्योंकि भारत में केंद्र को अधिक तथा राज्यों को कम शक्तियां प्राप्त हैं |
  • भारतीय संविधान – के अनुसार अनुच्छेद 1 में स्वतंत्र भारत का  वैधानिक(legal) नाम इंडिया(India  that is bharat shall be union of states) |
  • रोचक है कि संविधान में संघीय शब्द की जगह “राज्यों के संघ” शब्द का प्रयोग है  |
  • भारतीय संघ ना दो(2) राज्यों के बीच हुए करार का परिणाम (जैसा कि अमेरिका) है एवं भारत में नाही राज्यों को संघ से विलय होने का अधिकार है |
  • संविधान सभा ने केंद्र एवं राज्य दोनों को उचित ढंग से शक्तियां दी हैं |
  • “अंबेडकर ने कहा था” कि भारतीय संविधान को संघात्मक के संकीर्ण ढांचे में नहीं डाला गया है |
  • आईवर जिसने इसे “फेडरेशन विद ए सेंट्रलाइजिंग टेंडेंसी” कहां है |

संघ(Federation) के लक्षणों में –

  • लिखित संविधान
  • शक्तियों का संघ(union) एवं राज्य में विभाजन
  • स्वतंत्र न्यायपालिका
  • संविधान की सर्वोच्चता आदि में सभी लक्षण संगीत सभी लक्षण भारतीय संघ से मेल खाते हैं
  • किंतु इसमें संघ(union) को शक्ति अधिक तथा राज्य को शक्तियां कम है यह आरोप भी है कि यह शांति काल में संघात्मक है आपातकाल में एकात्मक
  • जी. ऑस्टिन ने –  इसे सहकारी संघवाद कहा जो उचित नहीं है किंतु नीति आयोग के माध्यम से वर्तमान केंद्र सरकार राज्यों के साथ बेहतर संबंध बनाने हेतु इस दिशा में अग्रसर है |

संविधान की विशेषताएं
  • आजादी के बाद भारत ने लोकतंत्र का रास्ता चुना|
  • इसके पीछे भारत के ऐतिहासिक सांस्कृतिक मूल्यों के साथ राष्ट्रीय आंदोलन के विचारों की भी प्रेरणा है
  • राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शब्दों में “असली स्वराज तब होगा जब किसी व्यक्ति के आंखों में आंसू नहीं होंगे”  डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने भी संविधान सभा में सामाजिक आर्थिक न्याय की समानता पर आधारित लोकतंत्र की बात कही
  • इस प्रकार 26 नवंबर 1949  को निर्मित संविधान का मूल उद्देश्य लोककल्याणकारी(Welfare State) राज्य की स्थापना करना था
  • संविधान की विशेषताएं –  संविधान की सबसे बड़ी विशेषता लोककल्याणकारी राज्य के निर्माण का लक्ष्य है इसलिए संपूर्ण प्रभुसत्ता आम जनता में सौंपी गई है
  • भारत में सरकार के किसी अंग को सर्वोच्च नामांकन संविधान की सर्वोच्च था दी गई है |
सबसे बड़ा लिखित संविधान (Lengthiest Constitution)
  • भारतीय संविधान को विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्रआत्मक संविधान का दर्जा (मूल रूप से 395 अनुच्छेद और अनुसूचियां 22 भाग) प्राप्त है |
  • आज इसमें 100 वां संशोधन (बांग्लादेश भूमि अंतरण, 118 बिल संसद में लंबित) 444 अनुच्छेद ,12 अनुसूची , 22 भाग है |
  • भारतीय संविधान के विस्तृत होने के कारणों में संघ एवं राज्य दोनों का संविधान होगा विशेष भाषा ,राज्य एवं पंचायतों से जुड़े प्रावधान के साथ प्रशासनिक बंधुओं (Povisions) का होना मुख्य माना जाता है |

 शासन की विशिष्ट संसदीय प्रणाली
  • जो ब्रिटिश मॉडल से प्रेरित है भारत में संशोधन के साथ अपनाई गई है ब्रिटिश संसद की सर्वोच्चता एवं अनुवांशिकता अध्यक्ष की व्यवस्था का त्याग करके भारतीय संसदीय प्रणाली को संविधान के अधीन रखते हुए इसे गणतंत्रआत्मक (republiccan) बनाया (निर्वाचित राष्ट्रध्यक्ष) गया है |
  • यही प्रणाली भारतीय राज्यों में भी लागू है
 एकीकृत न्यायपालिका
  • भारत की सर्वोच्च न्यायपालिका प्रणाली एकीकृत है इसके शीर्ष पर सुप्रीम कोर्ट है |
  • अमेरिका की तरह भारत में न्यायपालिका ना होकर संविधान के आदि ने किंतु इसे संविधान का संरक्षण अंतिम माना गया है |
  • भारत में न्यायपालिका (SC) नियुक्ति एवं पद से हटाने महाभियोग की प्रक्रिया की सुरक्षा के कारण अपने दायित्व का निर्वहन स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता के साथ करती है |
 न्यायिक समीक्षा
  • संविधान की अनूठी विशेषताओं में है इसके द्वारा सुप्रीम कोर्ट सरकार के सभी अंगो कार्यपालिका, विधायिका ,न्यायपालिका के कार्य एवं नीतियों की समीक्षा करके उसकी संवेदना संवैधानिक को सुनिश्चित करती है |

सरकार एवं न्यायपालिका के बीच कई विषयों पर मतभेद को गैर तार्किक ढंग से आज न्यायिक सक्रियता कहा जा रहा है –

प्राकृती संघात्मक(union) है – किंतु अमेरिका की तरह फेडरल( federal ) नहीं है | भारतीय संघ में अमेरिका के अमेरिका के विपरीत शक्तियों का वितरण केंद्र के पक्ष में अधिक तथा राज्यों को कम शक्तियां प्राप्त हैं

अनेक माध्यमों से – निर्मित भारतीय संविधान को कुछ समीक्षकों ने “उधार का थैला”(Borrowing Bag) भी कहा तथा इसे वकीलों के स्वर्ग की संज्ञा भी दी |

समीक्षात्मक राय  हैं कि – भारतीय संविधान देश काल की जरूरत के अनुसार अपनाया गया ऐसा लचीला संविधान है जो कुछ कमियों के बावजूद भी अपनी प्रासंगिकता(Relevancy) बनाए रखने में सफल है |

 भारतीय संविधान में संशोधन -की शक्ति अनुच्छेद 368 के अंतर्गत सांसद को दी गई है केसवानंद भारती बनाम केरल राज्य में सुप्रीम कोर्ट का फैसला 1973 के बाद संसद को संविधान की किसी भी भाग में (आधारभूत ढांचा छोड़कर) संशोधन (मूल अधिकार में भी) की शक्ति प्राप्त है |

 भारतीय संविधान – की यह विशेषता है कि संघ एवं प्रांत दोनों की शक्तियां एक ही संविधान में वर्णित हैं जबकि इसके विपरीत अमेरिका में संघ एवं प्रांत के संविधान पृथक पृथक हैं |

नागरिकता –  के संदर्भ में भारतीय संविधान पश्चिमी देशों की तुलना में अधिक उधार है |  भारत के सभी पांचों प्रकार के नागरिक वर्गों को समान अधिकार प्राप्त है तथा सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर चुने जाने योग्य मान्य है |

जबकि पश्चिम देशों में (अमेरिका ब्रिटेन फ्रांस जर्मनी) सर्वोच्च पदों पर चुने जाने हेतु जन्मा नागरिक होना अनिवार्य है |

भारतीय संविधान की विशेषताएं (Features of Indian Constitution)

फ्लैक्सिबिलिटी(Flexibility) एवं (un flexibility) का मिश्रण संविधान में मौजूद है इसका अर्थ है कि संविधान का अधिकांश हिस्सा आसानी से संशोधन योग तथा कुछ हिस्सा विशेष बहुमत से संशोधन योग्य है उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान लचीला अधिक कठोर कम है |

भारतीय संविधान का विस्तृत परिचय (Detailed introduction of Indian constitution)

Women Members in Constituent Assembly

Must read :–

राजभाषा(Official Language)
मूल कर्तव्य (Core Duties)
महत्वपूर्ण संविधान संशोधन(Important Constitution Amendment)
Vice-President -(उपराष्ट्रपति )
भारतीय संविधान(Indian Constitution)
संविधान के स्रोत : प्रकृति एवं विशेषताएं
संविधान की प्रस्तावना(Preamble to the Constitution)
नागरिकता(Citizenship)
मूल अधिकार (Fundamental Rights)
Directive Principles of Policy (Part -4, Articles 36 – 51)

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