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STATE HUMAN RIGHTS COMMISSION

STATE HUMAN RIGHTS COMMISSION :

  • मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 ना केवल केंद्र में अभी 2 राज्यों में भी मानव अधिकार आयोग की स्थापना का प्रावधान करता है|
  • राज्य मानव अधिकार आयोग केवल उन्हीं मामलों में मानव अधिकारों के उल्लंघन की जांच कर सकता है जो संविधान की राज्य सूची और समवर्ती सूची के अंतर्गत आते हैं|

 आयोग की संरचना (Commission Structure) :

  • राज्य मानव अधिकार आयोग के बहुसदस्यीय निकाय है जिसमें एक अध्यक्ष तथा दो अन्य सदस्य होते हैं इस आयोग का अध्यक्ष उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश तथा सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत या कार्यरत न्यायाधीश होता है |
  • राज्य के जिला न्यायालय का न्यायाधीश जिसे 7 वर्ष का अनुभव हो या कोई ऐसा व्यक्ति जिसे मानव अधिकारों के बारे में विशेष अनुभव को विधि आयोग के सदस्य बन सकते हैं|
  • इस आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल एक समिति की अनुशंसा पर करते हैं इस समिति का प्रमुख राज्य का मुख्यमंत्री होता है इसके अतिरिक्त विधानसभा अध्यक्ष राज्य का ग्रहमंत्री तथा राज्य विधानसभा में विपक्ष का नेता अन्य सदस्यों के रूप में होते हैं|
  • जिन राज्यों में विधान परिषद है उस राज्य की विधान परिषद का अध्यक्ष एवं विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी इस समिति के सदस्य होते हैं |
  • इसके अतिरिक्त एक सदस्य के रूप में राज्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद उच्च न्यायालय की एक कार्यरत न्यायाधीश या जिला न्यायालय के एक कार्यरत न्यायाधीश को राज्य मानव अधिकार आयोग में नियुक्त करता है |
  • आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु दोनों में से जो भी पहले पूर्व, तक होता है |
  • राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं परंतु   पदमुक्त उनको केवल राष्ट्रपति कर सकते हैं (ना कि राज्यपाल ) |
  • राष्ट्रपति इन्हें उसी आधार पर उनके पद से हटा सकते हैं जिस प्रकार से राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों को हटाते हैं |
  • राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों के वेतन भक्तों एवं अन्य सेवा शर्तों का निर्धारण राज्य सरकार करती है लेकिन इनके कार्यकाल के दौरान इसमें किसी प्रकार का  परिवर्तन नहीं किया जा सकता  |

आयोग के कार्य (Commission Functions) : State human rights commission

  • मानवअधिकार के उल्लंघन की जांच करना अथवा किसी लोक सेवक के समक्ष प्रस्तुत मानवअधिकारों उल्लंघन की प्रार्थना, जिसकी कि वह अवहेलना करता है कि जांच स्वप्रेरणा या न्यायालय के आदेश से करना |
  • न्यायालय में लंबित किसी मानव अधिकार से संबंधित कार्यवाही में हस्तक्षेप करना |
  • कारगर बागबंदी ग्रहों की स्थिति का अध्ययन करना वह इस बारे में सिफारिशें करना |
  • मानवअधिकार की रक्षा हेतु बनाए गए संवैधानिकविधिक उपबंध की समीक्षा करना तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु उपायों की सिफारिशें करना |
  • आतंकवाद रहित सहित उन सभी कारणों की समीक्षा करना जिससे मानव अधिकारों का उल्लंघन होता है तथा इनसे बचाव के उपायों की सिफारिश करना |
  • मानव अधिकारों के क्षेत्र में शोध कार्य करना एवं इन्हें प्रोत्साहित करना |
  • मानव अधिकारों के प्रति लोगों में चेतना जागृत करना तथा लोगों को इन अधिकारों के संरक्षण हेतु प्रोत्साहित करना|
  • मानव अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन (एन.जी.) को सहयोगी उत्साहित करने के लिए यदि कोई अन्य कार्य आवश्यक रूप से संपन्न करना |

आयोग की कार्यप्रणाली (Working of the commission) :State human rights commission

आयोग को अपने कार्यों को संपन्न करने के लिए व्यापक शक्तियां प्रदान की गई है इसी दीवानी न्यायालय के समस्त शक्तियां प्राप्त होती है तथा उसी के समान अपनी कार्यवाही को संपन्न करता है यह किसी मामले की सुनवाई के लिए राज्य सरकार या किसी अन्य अधीनस्थ अधिकारी को निर्देश दे सकता है|

 आयोग किसी मामले की जांच के दौरान अथवा उपरांत निम्नलिखित कदम उठा सकता है :

  • यदि व्यक्ति को क्षतिपूर्ति या नुकसान के भुगतान के लिए संबंधित सरकार या प्राधिकरण से सिफारिश कर सकता है|
  • यह दोषी लोक सेवक के विरुद्ध वितरण हेतु कार्यवाही प्रारंभ करने के लिए संबंधित सरकार या प्राधिकरण को सिफारिश कर सकता है |
  • यह संबंधित सरकार या प्राधिकरण से पीड़ित को तत्काल अंतरिम सहायता प्रदान करने की सिफारिश कर सकता है|
  • आयोग इस संबंध में आवश्यक निर्देश आदेश के लिए अथवा उच्च न्यायालय में जा सकता है|

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