Wednesday, February 1, 2023
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Excerpts from some questions asked to Swami Vivekananda by his teachers

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स्वामी विवेकानंद से उनके शिक्षकों के द्वारा पूछे गए कुछ प्रश्नों के अंश :–

स्वामी जी वेद के विषय में हमारा दृष्टिकोण किस प्रकार का होना चाहिए ?

भेज दो कि केवल उन्हीं अंशु को प्रमाण मानना चाहिए जो युक्त विरोधी नहीं है पुराना दिया न्यायशास्त्र वही तक रहे हैं जहां तक में वेद से विरोधी है वेद के पश्चात इस संसार में जहां कहीं जो भी धर्म भाव आगर बहुत हुआ है उसे वेद सहित रहित समझना चाहिए चार युग का काल विभाजन क्या ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार स्थित है अथवा केवल लुढ़कत ही है वेदों में तो कहीं ऐसे विभाजन का उल्लेख नहीं है

जयपुर आने की युवती निराधार कल्पना मात्र है भारत में कार्यप्रणाली कैसी होनी चाहिए पहले तो व्यावहारिक और शरीर सफल होने की शिक्षा देनी चाहिए ऐसे केवल 12 नरकेसरी संसार पर विजय प्राप्त कर सकते हैं परंतु लाख-लाख द्वारा यह नहीं हो सकता और दूसरे किसी व्यक्तिगत आदर्श के अनुकरण की शिक्षा नहीं देनी चाहिए चाहे वह आदर्श कितना ही बड़ा क्यों ना हो

भारत के पुनरुत्थान में रामकृष्ण मिशन क्या कार्य करेगा ?

इससे चरित्रवान व्यक्ति निकलकर सारे संसार को आध्यात्मिकता की बाढ़ से प्रभावित कर देंगे इसके साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों में भी पुनरुत्थान होगा इस तरह ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य जाति का अर्थ होगा शूद्र जाति का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा जो काम कर रहे हैं सब यंत्रों की सहायता से किए जाएंगे भारत की वर्तमान आवश्यकता है| क्षत्रिय सकती क्या मनुष्य के उपरांत अधोगामी पुनर्जन्म संभव है पुनर्जन्म पर निर्भर रहता है यदि मनुष्य पशु के समान आचरण करें कुंडली नाम की कोई वास्तविक वस्तु है श्री रामकृष्ण देव कहते थे योगी जी ने पद्म कहते हैं वास्तव में मनुष्य के शरीर में नहीं है योगाभ्यास से उनकी उत्पत्ति होती है |

क्या मूर्ति पूजा के द्वारा मुक्ति लाभ हो सकता है |

मूर्ति पूजा से साक्षात मुक्त की प्राप्ति नहीं हो सकती फिर भी वह मुक्ति प्राप्ति में कौन कारण स्वरूप है |सहायक है मूर्ति पूजा की निंदा करना उचित नहीं क्योंकि बहुओं के लिए मूर्ति पूजा ही |औरत ज्ञान की उपलब्धि के लिए मन को तैयार कर देती है |और केवल ज्ञान की प्राप्ति से ही मनुष्य मुक्त हो सकता है स्वामी जी हमारे चरित्र का सर्वोच्च आदर्श क्या होना चाहिए प्यार बौद्ध धर्म ने अपने दाएं के रूप में भ्रष्टाचार कैसे छोड़ा बौद्धों ने प्रत्येक भारतवासी को पूरा भिक्षुणी बनाने का प्रयत्न किया था| परंतु सब लोग तो वैसा नहीं हो सकते इस तरह किसी भी व्यक्ति के साधु बन जाने से वीडियो में चलता दी गई| और भी एक कारण था धर्म के नाम पर तथा अन्य देशों में बारबरा चारों का अनुकरण करना 1 स्थानों में धर्म प्रचार के हेतु गए और इस प्रकार उनके भीतर उन लोगों के दूषित बाजार प्रवेश कर गये अंत में उन्होंने भारत में इन समाचारों को प्रचलित कर दिया

इस प्रकार उनके भीतर उन लोगों के दूषित आचार प्रवेश कर गए अतः अंत में उन्होंने भारत में इन समाचारों को प्रचलित कर दिया माया क्या अनादि और अनंत है समष्टि रूप से अनादि अनंत अवश्य है पर व्यष्टि रूप से शांत है सीमित है ब्रह्म और माया का भूत शपथ नहीं होता अतः उनमें से किसी की भी परमार्थिक सकता एक दूसरे से अद्भुत कैसे सिद्ध की जा सकती है उसको केवल साक्षात्कार द्वारा ही सिद्ध किया जा सकता है जब व्यक्ति को ब्रह्म का साक्षात्कार हो जाता है तो उसके लिए माया की सत्ता नहीं रह जाती

जैसे रस्सी की वास्तविकता जान लेने पर सर्प का भ्रम फिर उत्पन्न नहीं होता माया क्या है वास्तव में वस्तु केवल एक ही है चाहे उसको चैतन्य कहो या जड़ पर उनमें से एक को दूसरे से नितांत स्वतंत्र मानना केवल कठिन ही नहीं असंभव है इसी को माया यह ज्ञान कहते हैं

क्या है मुक्ति का अर्थ है ?

पूर्ण स्वाधीनता शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के बंधनों से मुक्त हो जाना लोहे की श्रृंखला भी श्रृंखला ही है और सोने की श्रृंखला विश्वकला है श्री रामकृष्ण देव कहते थे पैर में कांटा चुभने पर उसे निकालने के लिए एक दूसरे कांटे की आवश्यकता होती है कांटा निकल जाने पर दोनों कांटे फेंक दिए जाते हैं |

इसी तरह सतपति के द्वारा असद प्रवृत्तियों का दमन करना पड़ता है परंतु बाद में 17 कृतियों पर भी विजय प्राप्त करनी पड़ती है भगवत कृपा बिना मुक्ति लाभ हो सकता है मुक्ति के साथ ईश्वर का कोई संबंध नहीं है मुक्ति तो पहले से ही बर्तमान है समझी हमारे भीतर इसे मैया हम कहा जाता है वह देहाती से उत्पन्न नहीं है इसका क्या प्रमाण है आत्मा की भांति मैया हम भी दे मन आदि से ही उत्पन्न होता है वास्तविक व्यक्तित्व का एकमात्र प्रमाण है साक्षात्कार सच्चा ज्ञानी और सच्चा पुत्र किसे कह सकते हैं जिसके हृदय में आता प्रेम है

और जो सभी अवस्था में अवैध तत्व का साक्षात्कार करता है वही सच्चा ज्ञानी है और सच्चा भक्त हो है जो परमात्मा के साथ जीवात्मा की अपील रूप से उपलब्ध कर यथार्थ ज्ञान संपन्न हो गया है जो सब से प्रेम करता है और जिसका हृदय सबके लिए रुदन करता है ज्ञान और भक्ति में से किसी एक का पक्ष लेकर जो दूसरे की निंदा करता है पहला तो ज्ञानी है ना बैठूंगी और धूर्त है |

ईश्वर की सेवा करने की क्या आवश्यकता है ?

यदि तुम एक बार ईश्वर के अस्तित्व को मान लेते हो तो उनकी सेवा करने के कारण पाओगे सभी शास्त्रों के मतानुसार भगवत सेवा का अर्थ है स्मरण यदि ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखते हो तो तुम्हारे जीवन में पग-पग पर उनको स्मरण करने का है तो सामने आएगा क्या बात है दोनों एक ही है माया बात को छोड़ आतंकवाद की और कोई भी व्याख्या संभव नहीं

तो आनंद है वह फिर मनुष्य रूप धारण कर इतने छोटे किस प्रकार हो सकते हैं यह सत्य है कि ईश्वर अनंत है परंतु तुम लोग अनंत का जो अर्थ सोचते हो अनंत का व्यर्थ नहीं है |अनंत कहने से तुम एक विराट जड़ सकता समझ पढ़ते हो इसी समझ के कारण तुम भ्रम में पड़ गए हो जब तुम यह कहते हो कि भगवान मनुष्य रूप धारण नहीं कर सकते तो इसका अर्थ तुम ऐसा समझते हो कि एक विराट जड़ पदार्थ को इतना छोटा नहीं किया जा सकता परंतु ईश्वर इस अर्थ में आनंद नहीं है उनका आनंद तत्व चैतन्य कारण तत्व है इसलिए मानव के आकार में अपने को अभिव्यक्त करने पर भी उनके स्वरूप को कुछ भी क्षति नहीं पहुंचती कोई-कोई कहते हैं कि पहले सिद्ध बन जाओ फिर तुम्हें कर्म करने का ठीक-ठीक अधिकार होगा परंतु कोई कहते हैं कि शुरू से ही कर्म करना दूसरों की सेवा करना उचित है किंतु विभिन्न मतों का सामंजस्य किस प्रकार हो सकता है तुम तो दो अलग-अलग बातों को एक में मिलाएं दे रहे हो इसलिए भ्रम में पड़ गए हो कर्म का अर्थ है |मानव जाति की सेवा अथवा धर्म प्रचार कार्य यथार्थ प्रचार कार्य में अवश्य ही सिद्ध पुरुष के अतिरिक्त और किसी का अधिकार नहीं है| परंतु सेवा में तो सभी का अधिकार है इतना ही नहीं जब तक हम दूसरों से सेवा ले रहे हैं तब तक हम दूसरों की सेवा करने को बाध्य पी है स्वामी जी गुरु किसे कह सकते हैं जो तुम्हारे भूत भविष्य को बता सके वही तुम्हारे गुरु है दिल आप किस प्रकार होता है भक्ति तो तुम्हारे भीतर ही है केवल उसके ऊपर काम कांचन का एक आवरण सा पड़ा हुआ है उसको हटाते ही भीतर कि वह भक्ति स्वयं प्रकट हो जाएगी |

Excerpts from some questions asked to Swami Vivekananda by his teachers ?

Swami ji, what should be our attitude regarding Vedas, please send that only those fragments should be accepted as evidence, which are not anti-yukta. Whatever religion has become very important, it should be considered without Vedas. Is the time division of four eras based on the calculation of astrology or is it just a fallacy? There is no mention of such division in the Vedas. What should be the methodology in India, first of all practical and body should be taught to be successful, such only 12 narkesari can conquer the world but it cannot be done by lakhs and lakhs and should not be taught to follow any other personal ideal. No matter how big that ideal may be, what work will Ramakrishna Mission do in India’s resurgence, people of character will come out of it and affect the whole world with the flood of spirituality, along with it there will be resurgence in other areas as well. Raishya caste would mean Shudra caste would cease to exist All the work that is being done would be done with the help of machines India’s present need is Kshatriya caste Is it possible after man to be reborn after the downfall depends on rebirth if man behaves like animal Do there is any real thing called Kundli Sri Ramakrishna Dev used to say that Yogi ji says Padma is actually not in the body of a human being they are created by yoga practice Can there be salvation through idol worship Real liberation can be achieved by worshiping idols It cannot be, yet it is a reason that is helpful in attaining liberation. It is not right to condemn idol worship, because for daughters-in-law, idol worship only prepares the mind for the attainment of knowledge, and man becomes free only by the attainment of knowledge. May be Swami ji what should be the supreme ideal of our character love how Buddhism left corruption as its right Buddhists tried to make every Indian a complete nun but all people cannot be like that There was one more reason given in the video that any person became a monk, in the name of religion and imitating Barbara Charon in other countries, went to 1 places for preaching religion and thus entering the contaminated market of those people within them. Finally they made these news popular in India

2 went and in this way the corrupt practices of those people entered inside them, so in the end they made these news popular in India Maya what is eternal and infinite; The ghost of Maya is not an oath, so how can the charitable power of any one of them be proved to be wonderful from the other, it can be proved only by interview. When a person gets the interview of Brahma, then there is no power of Maya for him. It remains as if knowing the reality of the rope, the illusion of snake does not arise again. What is illusion, in reality there is only one object, whether it is called consciousness or root, it is not only difficult but impossible to consider one of them completely independent from the other. Maya calls this knowledge what is liberation means complete freedom to be free from both auspicious and inauspicious bonds. Iron chain is also a chain and gold chain is world art. Sri Ramakrishna Dev used to say that when a thorn pricks the leg, it is necessary to remove it. requires a second fork Both the thorns are thrown away when they come out. Similarly, the evil tendencies have to be suppressed by Satpati, but later on 17 creations also have to be conquered. Liberation can be achieved without God’s grace. Salvation is already present within us, it is called Maiya Hum, what is the proof of this, it is not born from the village, like the soul, Maiya Hum De, also arises from the mind etc. The only proof of the real personality is the interview of the true knower and Who can be called a true son, the one who has love in his heart and the one who interviews the illegal element in all situations, he is the true scholar and the true devotee, who has attained true knowledge by making the appeal of the soul to the Supreme Soul. Loves all and whose heart weeps for all One who favors one of the knowledge and devotion condemns the other The first one is wise, will not sit and is cunning What is the need to serve God if you once If you accept the existence of God, then to serve him You will find the reason, according to all the scriptures, Bhagwat service means remembrance. If you believe in the existence of God, then you have to remember him at every step in your life, then what is the matter will come to the fore. no explanation possible

So there is joy, then how can he become so small by taking the human form, it is true that God is infinite, but what you people think of the meaning of infinite, infinite is not in vain, by saying infinite, you can understand a huge root, you read with this understanding. Because of this you are in confusion when you say that God cannot take human form then you understand it to mean that a vast inert matter cannot be reduced to such a small size but God is not bliss in this sense His bliss The element consciousness is the causal element, so even if it manifests itself in the form of a human, nothing harms its form. It is right to do work and serve others, but how can there be harmony between different opinions, you are mixing two different things in one, so you are confused, karma means service to mankind or religion. No one has any right except a perfect man in the real propaganda work, but everyone has a right in the service. Not only this, as long as we are taking service from others, we are bound to serve others. So it is within you only that there is a covering of lust on it, as soon as you remove it, that devotion will manifest itself.

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